जिंदगी की दूसरा किनारा 32 और वहीं दूसरी तरफ में मेघना की दुनिया में मेघना कमरे मे अब भी चादर तान के और बॉडी को सिकोड़ते हुए लेटी हुई अपने सामने दीवार पर लगी हुई आईने की तरफ देखते हुएऔर शिसक शिसक कर हल्की गहरी सांस लेते हुए और सोच में पढ़ते हुएऔर तभी अचानक चलते हुए रिया आकर मेघना के दरवाजे के पास खड़ी होती है और हाथ उठाकर हाथों को मोड़ते हुए उल्टी उंगलियों से मेघना के दरवाजा नो करते हुए हल्के ऊंची आवाज में कहती है मेघना दी उठुए और आकर खाना खा लीजिए और वही मेघना उसकी बातें सुनती है और कोई प्रति क्रिया नहीं देती उसके ध्यान आप तलाक सामने दीवार पर