पिंकू की परी - 2

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तरबूज के बीज और बनारसी थप्पड़'सर्रर्र... भूंऊऊऊ...' की अजीब सी आवाजें पिंकू पांडे के कानों में लगातार गूँज रही थीं। पीठ के नीचे की हड्डी में थोड़ी ठंडक का अहसास हुआ, तो पिंकू ने झटके से अपनी आँखें खोल दीं।कमरे की वो जानी-पहचानी फटी हुई चटाई और सीलन भरी दीवारें गायब थीं। पिंकू इस समय स्टील की एक चमचमाती हुई ठंडी टेबल पर लेटे हुए थे। चारों तरफ अजीबोगरीब मशीनें लगी थीं, जिनमें नीली, हरी और लाल बत्तियां भुक-भुक जल रही थीं। छत पर लोहे के बड़े-बड़े पाइप थे, जिनसे हल्का सा धुआँ निकल रहा था।पिंकू ने घबराकर अपने कुर्ते