कुर्सी

  • 120
  • 51

“कुर्सी बदलते देर नहीं लगती, लेकिन इंसान की पहचान उसके व्यवहार से होती है।”समय बड़ी खामोशी से यह बदल देता है कि हम कहाँ बैठे हैं।कुछ साल पहले मैं स्कूल की एक विदाई पार्टी में गई थी।उस दिन स्कूल का माहौल हमेशा से थोड़ा अलग था। कुछ लोग खुश थे, कुछ भावुक। पुराने किस्से याद किए जा रहे थे और आने वाले बदलाव की बातें हो रही थीं।प्रिंसिपल मंच पर बैठे थे और हमेशा की तरह सबको निर्देश दे रहे थे।उनके आते ही शिक्षक खड़े हो जाते थे।सब उनकी बात ध्यान से सुनते थे।किसी को कोई काम होता, तो उनकी