सूखे पत्तों का माली एक पिता, एक बगीचा और अधूरे रिश्तों की कहानी️ लेखक — कांतिभाई राठौड़ बदामिया« “जिसने पूरी उम्र फूल खिलाए…वही बुढ़ापे में अपनों के लिए तरस गया…” »कभी-कभी इंसान अपने बच्चों का भविष्य सँवारते-सँवारते अपना वर्तमान खो देता है।वह बच्चों के लिए घर बनाता है…उनके सपनों के लिए अपनी इच्छाएँ छोड़ता है…उनकी खुशी में अपनी खुशी ढूँढ़ता है…लेकिन जब जिंदगी की शाम आती है, तो वही हाथ जो कभी बच्चों को संभालते थे, किसी अपने के सहारे के लिए तरसने लगते हैं।यह कहानी है हरिराम की…एक साधारण माली की।जिसने पूरी जिंदगी दूसरों के बगीचे में फूल