श्रापित नज़र - 2

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राजीव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,All right, Miss श्रावणी. तुम्हारी आँखों में सच्चाई है। Welcome to JS Group of Architectures।यह सुनते ही जैसे समय एक पल को ठहर गया।श्रावणी की उंगलियाँ, जो अब तक फाइल के कोने को कसकर पकडे थीं, ढीली पड गईं। उसके चेहरे पर खुशी की चमक फैल गई — धीमे- धीमे, जैसे सूरज बादलों के पीछे से निकलता है।उसकी आँखों में सपनों की रोशनी साफ दिखाई दे रही थी।वर्षों का संघर्ष।अनगिनत रातों की दुआएँ।अकेलेपन के बीच खुद को संभालना।सब जैसे एक क्षण में सार्थक हो गया।Thank you so much, सर… उसकी आवाज में कृतज्ञता थी