राठौर मेंशन की भव्य सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चंचल मुस्कुराती हुई अन्विका को ऊपर ले जा रही थी।पूरे कॉरिडोर में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। दीवारों पर लगी महंगी पेंटिंग्स, सुनहरे फ्रेम वाले बड़े-बड़े आईने और छत से लटकते क्रिस्टल के झूमर पूरे माहौल को किसी शाही महल जैसा बना रहे थे।अन्विका चलते-चलते हर चीज़ को बहुत ध्यान से देख रही थी।उसकी निगाहें किसी नई दुल्हन की तरह घर की खूबसूरती नहीं निहार रही थीं, बल्कि किसी ऐसे इंसान की थीं जो अपने दुश्मन के किले का एक-एक कोना याद कर लेना चाहता हो।कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद चंचल एक