अनंत के उस पार - 8

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घर के पीछेबिट्टू की वह आख़िरी फुसफुसाहट "वो आदमी हर रात आपके घर के पीछे खड़ा रहता है" मीरा के कानों में किसी भारी घंटी की तरह गूँज रही थी।नील झील से शर्मा हवेली की तरफ़ जाने वाला संकरा, पथरीला रास्ता चढ़ते हुए मीरा का हर कदम भारी हो रहा था। शाम के चार बज रहे थे, लेकिन नीलगढ़ के ऊपर कोहरे की चादर इतनी घनी हो चुकी थी मानो रात ने अपना पहला साया गिरा दिया हो। चीड़ के पेड़ों के बीच से बहती हवा में एक बर्फ़ीला दंश था जो कपड़ों को चीरकर हड्डियों तक उतर रहा था।पहाड़ी