नील झीलथाने की सीढ़ियाँ उतरते हुए मीरा के पैरों की आहट उस ठंडी, भीगी सुबह में गूँज रही थी।इंस्पेक्टर वीरेंद्र रावत के वे अंतिम शब्द "इस कस्बे में कुछ सवाल कभी नहीं पूछने चाहिए" हवा में किसी पुराने श्राप की तरह तैर रहे थे। पुलिस प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए थे। डॉ. सक्सेना की रिपोर्ट को मोहरा बनाकर आर्यन की मृत्यु पर 'दुर्घटना' की मुहर लगा दी गई थी। लेकिन ४० साल पुराने उस पीले कागज़ पर ताज़ी नीली स्याही से लिखे दो शब्दों "सो जाओ" ने मीरा को यह साफ़ बता दिया था कि नीलगढ़ का सच किसी