बोध ------कहानी सगरहे की जबरदस्त कहानी मेरी पिरये सबसे जयादा..... ( बोध ) वक़्त मे याद रखो महान नहीं बनना है... इंसान बनना है। जो किसी के काम आ सको... आलोचक नहीं, तुम कुछ नहीं जानते। न उसकी प्रकिति को जान सकते हो। याद रखो बस याद रखो। तुम इतना करो जो तुम्हारे फ़र्ज़ है वो तुम आराम से बच्चों के लिये कर जाओ। कुछ खास नहीं है, चलो तो सही।आपने फ़र्ज़ शिके पर टांग दो गे... वाह बहुत खूब। भाग जाओगे कितनी दूर, तुम दिशाहीनता मै रहना चाहुगे... मंजिल बरकरार बनी रहे उस पर पहुंचने का दम