रामलाल ने अपनी माँ की मृत देह को धीरे से जमीन पर रख दिया।कुछ क्षण तक वह निःशब्द माँ के चेहरे को देखता रहा। फिर जैसे उसके भीतर वर्षों से दबा हुआ कोई बाँध अचानक टूट गया। वह जोर से दहाड़ मारकर रो पड़ा।“भैया... मेरे चलते माँ ने हमें छोड़ दिया।”फिर उसने अपनी भाभी की ओर मुड़कर कहा—“भाभी माँ के समान होती हैं... तुम मुझे अवश्य माफ करोगी।”उसकी आवाज काँप रही थी।फिर वह माँ के निर्जीव चेहरे की ओर देखकर फूट-फूटकर बोला—“नानकू की माँ... मैंने जिंदगी भर तुझे केवल आँसू दिए। मुझे माफ कर देना।”चम्पा मुर्मू भी अपने आँसू रोक