सात फेरों की रस्म पूरी हो चुकी थी।अग्नि को साक्षी मानकर रुद्रांश राठौर और अन्विका मल्होत्रा अब दुनिया की नज़रों में पति-पत्नी बन चुके थे।पूरे हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज रही थी।हर चेहरे पर मुस्कान थी।हर कोई इस शाही शादी का हिस्सा बनकर खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रहा था।लेकिन...अगर कोई उनके दिलों के भीतर झाँक सकता...तो समझ जाता कि इस शादी में प्रेम नहीं...सिर्फ नफ़रत ने सात फेरे लिए थे।रुद्रांश और अन्विका एक-दूसरे के पास खड़े जरूर थे...लेकिन दोनों के बीच पति-पत्नी जैसा कोई रिश्ता नहीं था।उनके बीच अगर कुछ था...तो सिर्फ बदला...और एक-दूसरे को बर्बाद करने की