अभी कहानी बाकी है - 2

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नई जगह, नया जीवनआखिरकार मैं अपनी दादी के रिश्तेदारों के घर रहने चला गया।शुरुआत में सब कुछ थोड़ा नया-नया सा लग रहा था।नया घर, नए लोग और नया माहौल…लेकिन धीरे-धीरे समय बीतने लगा और मैं भी उस घर के माहौल में ढलता चला गया।मैं वहाँ सिर्फ रहने वाला नहीं था, बल्कि घर के कामों में भी हाथ बँटाता था।कभी घास लाने जाना,कभी पेड़ काटने का काम,तो कभी घर के दूसरे छोटे-बड़े काम…जो काम सामने आता, मैं अपनी तरफ से करने की कोशिश करता।उस समय शायद मुझे ये सब बहुत सामान्य लगता था।मैं बस यही सोचता था कि जिस घर में