अध्याय - 10गायत्री और मानस के बीच एक बार फिर प्यार का नया पुल बंध गया था। 'सब्र का फल मीठा होता है' की कहावत के अनुसार गायत्री ने सब्र रखा और उसे उसका मीठा फल चखने को मिल ही गया। यही नहीं, गायत्री ने समझदारी दिखाते हुए बड़ा दिल रखा और रिश्ते में घमंड को दूर रखकर रिश्ते को जीत लिया। रिश्तों में अक्सर पहल हमेशा औरत को ही करनी पड़ती है, क्योंकि शायद औरत के पास ही वह कुदरती ताकत है।नारी तू नारायणी, कभी न तू हारी।खट्टी-मीठी, तीखी, कड़वी और कभी खारी!तेरी जिंदगी है अनेक स्वादों से भरी-भरी,नवरसों