यादों के झरोखे से - त्योहारकोई सा भी त्योहार हो अकेले नहीं मना सकते। बड़े पूर्वजों ने भी बहुत-सोच-समझकर त्योहार बनाए। इन्हीं बहानों से बोरिंग जिंदगी में रंग भर जाते हैं। रोज की दिनचर्या में कुछ बदलाव आ जाता है। इन्हीं त्योहारों के बहाने रिश्तेदार आपस में मिलते हैं। बहनों को मायके जाने का मौका मिल जाता है। ये तीज त्योहार न हो तो सोचो कितनी बोरिंग हो जाएगी जिंदगी। रोज एक ही काम, एक ही दिनचर्या। परिवर्तन संसार का नियम है और जरूरी भी है।भले ही अब इन त्योहारों का रूप बदल गया है लेकिन दौड़ती-भागती जिंदगी में संघर्ष