भाग – 1आईने में बदलता जीवनआज जब मैं खुद को आईने में देखती हूँ, तो कुछ अलग-सा महसूस होता है। आईने में चेहरा तो वही दिखाई देता है, लेकिन लगता है जैसे जीवन में न जाने कितने बदलाव आ गए हैं।एक समय था, जब लोग एक साथ बैठते थे, परिवार की तरह रहते थे। एक-दूसरे पर पूरा विश्वास करते थे। रिश्तों में अपनापन था और लोग सामाजिक तथा व्यवहारिक भी थे। किसी के सुख-दुःख में साथ खड़े होना स्वाभाविक था।लेकिन आज चारों ओर देखती हूँ तो बहुत कुछ बदला हुआ दिखाई देता है। जैसे किसी को किसी से कोई मतलब