जिंदगी की दसरा किनारा पाठ 30 और वही मेघना की दुनिया मेंमेघना लेटी हुई है अपने बॉडी को सिकोड़ते हुएऔर बाहर मोहौल में बस अधेरा हैऔर तभी अचानक उसके पलको में हरकत होती है और वह अचानक से पलके सीकोड़ लेती है और फिर धीरे-धीरे उसके अंधेरी पलको के अंदर एक धुंधली दुनिया आकार लेने लगती है एक स्कूल के बाहर चलते हुए एक बच्ची वह दृश्य अचानक सामान्य से जल्दी समय में बितने लगती है स्कूल की छुट्टी हो चुकी है और बहुत सारे बच्चे हमगामा करते हुए स्कूल से बाहर दौड़ते हुए आ रहे हैं इस बीचएक बच्ची अपने कंधे पर बैंग लेते हुए स्कूल से बाहर जा रही है ग्राउंड