अगले भाग में हमने देखा कि कैसे कजरी अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रही है। अब आगे जब सभी गांव वाले दोनों मां बेटी को ढूंढने लगे । कहते हैं ना जब भाग्य खेल खेलता है तो किसी की नहीं चलती। कजरी और उसकी बेटी दोनों आखिरी में पकड़े ही गए। इन सब घटनाओं के बाद मोहनलाल बहुत गुस्से में था की कही इन मां बेटी को मार ही न डालें पर उसके दोस्तो और सब गांव वालों की बात मानकर वह शांत हो गया और सब लोग शादी करवाने के लिए दृष्टि को घर ले गये । अब तो