रक्षा सूत्र

  • 252
  • 60

लघु कथा- रक्षा-सूत्र लेखिका डॉ वंदना शर्मा आरव के स्कूल में आज "राखी बनाओ" गतिविधि हुई। रंग-बिरंगे धागों, मोतियों और कागज से उसने एक बहुत सुंदर राखी बनाई। अध्यापिका ने तारीफ भी की। छुट्टी होते ही आरव दौड़कर घर पहुंचा। उसकी आंखों में उदासी थी। उसने अपनी मम्मी रीना से पूछा - "मम्मी, मेरे तो कोई बहन नहीं है। इस राखी का मैं क्या करूं? किसकी कलाई पर बांधूं?"रीना बेटे की उदासी समझ गई। उसने आरव को गोद में बिठाया और माथा चूमा। "बेटा, आओ आज मैं तुम्हें रक्षा-सूत्र की कहानी सुनाती हूं।"रीना ने कहना शुरू किया - "प्राचीन समय में जब देवता