राहें - 19

परमार्थडा. सिंह साहब के घर कोहराम मचा हुआ था। उनका मंझलाबेटा गगन सुबह-सुबह चल बसा था। सिंह साहब की पत्नी पछाड़खा खाकर रो रही थी। गगन की पत्नी श्रेया भी रोये जा रही थी,दो छोटे-छोटे बच्चो को छोड़कर गगन दुनियाँ छोड़कर चला गयाथा। सबका दुखी होना स्वभाविक भी था। होली त्यौहार के एक दिनपहले गगन का यों जाना पास पड़ोस में सभी के लिये दूखदायी था।सुबह सुबह पलंग पर ही सोये हुये ही उनके प्राण पखेरू उड़ गयेथे।परिजनों का दुःखी होना स्वाभाविक था। कुछ वर्ष पूर्वसिंह साहब के बड़े बेटे मदन की भी हदयघात से मृत्यू हो गयी थी।वह भी