वह आँगन अभी बाकी है

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वह आँगन अभी बाकी हैअध्याय 1 — बंद दरवाज़े के पीछेसुबह के पाँच बज रहे थे।आसमान अभी पूरी तरह उजला नहीं हुआ था। गली में कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट जल रही थी और ठंडी हवा खिड़की के पर्दों को धीरे-धीरे हिला रही थी।लेकिन उस छोटे-से घर में किसी की आँखों में नींद नहीं थी।सावित्री देवी आँगन में बैठी तुलसी के पौधे के सामने दीपक जला रही थीं।“हे भगवान… मेरे बच्चों को सुखी रखना।”हर रोज़ की तरह आज भी उन्होंने यही प्रार्थना की थी।लेकिन आज उनकी आवाज़ में एक अजीब-सी थकान थी।पीछे कमरे में उनकी बेटी अनन्या चुपचाप खड़ी थी।तीन महीने बाद