आशिकी.....अब तुम ही हो। - 14

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अध्याय:14जन्माष्टमी का भव्य कार्यक्रम समाप्त हो चुका था और श्रद्धालु अपने घर लौट चुके थे।अब आगे...........................!!दिल्ली ,होटल रूम की बालकनी में दो कुर्सियां रखी थी, दूर आसमान में तारे टिमटिमा रहे थे।एक कुर्सी पर आनंद और दूसरी पर अनिरुद्ध;दोनो के हाथों में गरमा गरम कॉफी के कप थे।अनिरुद्ध की नजरे बिना झपके आसमान पर टिकी हुई थी ,जैसे उन चमकते सितारों में वो किसी अपने को ढूंढ रहा हो....!!आनंद ने कॉफी की एक शिप ली और कुछ देर उसे देखता रहा..!!आनंद: अनी...!!अनिरुद्ध:(आसमान में नजरे खड़ाए हुए) हम्म् ।आनद: क्या हुआ??अनिरुद्ध: कुछ नही..!!आनंद:(कुछ देर उसके चेहरे को पढ़ता रहा फिर धीमी