आलसी रामू

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आलसी रामूएक छोटे-से गाँव में रामू नाम का एक आदमी रहता था। शरीर से वह हट्टा-कट्टा और मजबूत था, मगर आलस्य ने उसकी सारी शक्ति पर जैसे ताला लगा दिया था।काम से उसे ऐसी चिढ़ थी मानो मेहनत करने से कोई बड़ा अपराध हो जाएगा। वह काम कम करता और बातें अधिक। उसकी बातों में भी दूसरों की प्रशंसा कम, निंदा अधिक होती थी।सुबह सूरज गाँव के ऊपर चढ़ आता। खेतों में हल चलने लगते, मजदूर अपने औजार लेकर निकल जाते, पशु चरने चले जाते; मगर रामू की चारपाई तब भी नहीं छूटती।उसकी माँ सागरी देवी रोज आवाज लगाती—“रामू! उठ