असीमित पुण्य

बअसीमित पुण्यगुजरात की एक प्रसिद्ध रियासत में राजमाता मीलण देवी रहती थीं। वह भगवान के प्रति अत्यंत श्रद्धालु थीं और धर्म-कर्म में उनका विशेष विश्वास था। एक दिन उन्होंने निश्चय किया कि वह भगवान सोमनाथ जी का भव्य अभिषेक और पूजन करेंगी। पूरे विधि-विधान के साथ उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने सोने का तुलादान कराया—अपने वजन के बराबर सोना तुला पर रखकर भगवान को अर्पित कर दिया। मंदिर में उपस्थित सभी लोग राजमाता की भक्ति और दान देखकर उनकी प्रशंसा करने लगे।इतना बड़ा दान करने के बाद धीरे-धीरे राजमाता के मन में अहंकार आने लगा। वह मन