बारह बजे के बाद - 1

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अध्याय 1 : बारह बजने से पहलेसर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा रहा था। हर सड़क पर जश्न था। होटल, क्लब और फार्महाउस संगीत की तेज़ धुनों से गूँज रहे थे। हर कोई पुराने वर्ष को विदा करने और नए वर्ष का स्वागत करने की तैयारी में था लेकिन उसी शहर के बाहर, घने साल के जंगलों के बीच बने पुराने सरकारी विश्राम गृह में एक ऐसा सन्नाटा पसरा था, जो किसी तूफ़ान के आने की सूचना दे रहा था। कमरा नंबर पाँच...दीवार घड़ी की सेकंड वाली सुई लगातार आगे बढ़ रही थी। रात के 10 बजकर