अंश, कार्तिक, आर्यन - 18

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कल्याणी ने धीरे से अपना दूसरा हाथ अपने पेट पर रखा। उसकी आँखों में अपने अजन्मे बच्चे की चिंता साफ़ झलक रही थी। रणजीत ने उसकी आँखों में देखते हुए दृढ़ स्वर में कहा—"में तुम दोनों को कुछ नहीं होने दूंगा में वादा करता हूँ! उसके आदमियो ने श्री मलोत्रा के अधजले शरीर को उठाकर दूसरी गाड़ी में लिटाया गया। दूसरी ओर रणजीत ने कल्याणी को अपनी बाँहों में उठाकर कार की पिछली सीट पर लिटाया।"पूरा रास्ता खाली करवाओ!" रणजीत गरजा I तीनों गाड़ियाँ तेज़ रफ़्तार से शहर की ओर दौड़ पड़ीं।अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टर और नर्सें स्ट्रेचर लेकर बाहर आ