तिरंगे की शान

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तिरंगे की शान"  लघुकथा - वंदना शर्मा15 अगस्त का दिन था। सुबह से ही पूरे विद्यालय में उत्सव का माहौल था। सभी बच्चे उत्साह से विद्यालय प्रांगण में पंक्तिबद्ध खड़े थे। छात्राओं ने बालों में तिरंगा रिबन बांधा हुआ था और हाथों में तिरंगा पट्टी बांधी थी। चारों ओर देशभक्ति का वातावरण बना हुआ था। हवा में भी "मेरी शान तिरंगा है" गीत की धुन घुली हुई थी।मंच पर सभी अध्यापिकाएं और प्रधानाचार्या जी आसीन थीं। ठीक 8 बजे प्रधानाचार्या जी मंच पर आकर ध्वज फहराती हैं। सभी छात्राएं एक साथ राष्ट्रगान गाती हैं। "जन-गण-मन" की आवाज जब पूरे मैदान में