सड़क किनारे की चाय— चाँदनी चौधरीकुछ समय पहले की बात है। मैं अपने कुछ प्रिय मित्रों के साथ एक यात्रा पर निकली थी। लंबा सफर तय करने के बाद हमने सड़क किनारे बनी एक छोटी-सी चाय की दुकान पर रुकने का निश्चय किया। दुकान साधारण थी, पर उसके चारों ओर फैली प्रकृति उसे असाधारण बना रही थी।दूर-दूर तक फैली हरियाली मानो धरती ने हरी चादर ओढ़ रखी हो। सामने ऊँचे-ऊँचे पहाड़ अपनी विशालता का परिचय दे रहे थे। ऊपर नीला, निर्मल आकाश और उसमें तैरते सफेद बादल किसी चित्रकार की सुंदर कल्पना जैसे प्रतीत हो रहे थे। मंद-मंद चलती हवा