विजय शर्मा एरी अजनाला, अमृतसर स्कूल का पहला दिन सुबह की पहली किरण जब खिड़की से अंदर घुसी, तो रोहन की आँखें पहले से ही खुली हुई थीं। उसने पूरी रात लगभग नहीं सोई थी। तकिया गीला हो चुका था पसीने से और दिल की धड़कनें ऐसी लग रही थीं जैसे कोई ढोल पीट रहा हो। आज उसका स्कूल का पहला दिन था।रोहन आठ साल का था। अब तक वह घर पर ही माँ से अक्षर सीखता रहा था। माँ कहती थीं, “बेटा, स्कूल जाने का समय आ गया है। वहाँ तुम्हें