गाँव की मिट्टी में जब पहली बारिश की बूँदें गिरतीं, तो सबसे पहले जो आवाज़ सुनाई देती थी, वह थी हल की चरचराहट और बैलों के गले में बँधी घंटियों की टुनटुन। उन्हीं आवाज़ों में एक थी हीरा की — एक बूढ़ा, थका हुआ, पर अब भी अपनी चाल में एक गरिमा लिए हुए बैल, जिसने बीस बरसों तक इस खेत की मिट्टी को अपने पसीने से सींचा था।हीरा को इस खेत में लाया गया था तब, जब किसान रामदीन का बेटा मोहन मुश्किल से पाँच साल का था। मोहन को याद था — बछड़े की उमर में हीरा कैसे