गाँव की सोंधी खुशबू वाली उस पगडंडी पर धूल उड़ रही थी। शाम का वक्त था, और गाँव के माहौल में अजीब सा सुस्ती भरा सुकून था। यहाँ ज़्यादातर लोगों के पास पैसे की तंगी रहती थी, कुछ गिने-चुने लोग ही थे जिनके पास खेती-बाड़ी या थोड़ी बहुत पूँजी थी। बाकी लोग या तो दिहाड़ी मजदूरी करते थे या फिर दूसरों के खेतों में पसीना बहाते थे। लेकिन सोनू इन सबसे अलग सोचता था।सोनू ने एक दिन अपने पक्के दोस्तों के बीच छाती फुलाकर ऐलान कर दिया कि अब वह मजدूरी या छोटे-मोटे काम छोड़कर दूध का बड़ा व्यापार करेगा।