आजादी

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आजादी - एक अधूरे खत की पूरी कहानीसन 1930 की बात है। बंगाल के एक छोटे से गाँव सोनापुर में एक लड़का रहता था - बिरजू। बिरजू की उम्र उस समय महज बारह साल थी। उसके पिता हरिराम काका गाँव के स्कूल में मास्टर थे और अपनी छोटी सी दुनिया में भी वे रोज़ एक ही बात कहते थे, "बेटा, गुलामी सबसे बड़ा अभिशाप है।"बिरजू को इस बात का मतलब तब तक समझ नहीं आया था, जब तक एक दिन उसने अपने गाँव के मेले में एक दृश्य नहीं देखा। गाँव के ज़मींदार के आदमी एक बूढ़े किसान को सिर्फ