अंधेरे में कोई है लेखक: विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry)रात के बारह बज चुके थे। शहर की हलचल थम चुकी थी। सिर्फ कभी-कभी दूर किसी कुत्ते की आवाज़ या हवा में पत्तों की सरसराहट सुनाई देती। अनिरुद्ध अपनी नई किराये की फ्लैट में बैठा था। यह फ्लैट शहर के पुराने हिस्से में थी—तीसरी मंजिल, पिछली तरफ, जहाँ दिन में भी कम रोशनी आती थी।वह पिछले हफ्ते ही यहाँ शिफ्ट हुआ था। कंपनी ट्रांसफर हो गया था। परिवार गाँव में था। अकेलापन उसे पसंद नहीं था, लेकिन मजबूरी थी। फ्लैट पुरानी थी। दीवारों पर पीला पेंट उखड़ रहा था।