गुरु गोविंद सिंह का सचित्र जीवन - 5

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बाल गोविन्द जी उस वक्त तक हाथ पैर चलाने लाएक हो ग‌ए थे उन्होंने अपने हाथों से मिश्री और स्वर्ण मुद्राएं के घड़े पकड़ लिए थे।बाल गोविन्द की मजबूत पकड़ देखकर,पीर जी बहुत खुश हुए उन्होंने आगे बढ़ कर अपनी छाती से लगा लिया, फिर उसका माथा चूम कर आशिर्वाद दिया। खुदाबंद करीम मेहर करे और दोनों लोकों में तेरी पकड़ मजबूत हो।बाल गोविन्द का पालन पोषण राजकुमार की तरह हुआ,बाल गोविन्द की देखभाल के लिए सेवकों की कोई कमी नहीं थी।ज्यों ज्यों बाल गोविन्द थोड़ा थोड़ा संज्ञान होता गया,तो उन्हें गुरू घर की परम्पराओं को समझाने का प्रयास किया