राहें - 14

मरना तो हैसाकेत कई दिनों से परेशान हो रहा था। बेटी की शादी कीतैयारी पूरी हो चुकी थी, कल बारात आने वाली है और सुनार ने बेटीके आभूषण अभी तक बनाकर नहीं दिये थे। घर में पिताजी भीचिल्लाते और उसे लापरवाह समझकर डॉटते रहते थे, परन्तु सुनार की भीअपनी मजबूरी थी, उसके पिता भी इसी बीच संसार से चल बसेइसलिये मिले हुये आर्डर को वह समय पर पूरा नहीं कर पा रहा था।आज साकेत सुनार की दुकान पर जाकर स्वम बैठ गया और 20 तौले सोनेके जेवर लेकर वह दुकान से जैसे ही निकला तो एक अपरिचितगाड़ी उसके सामने आकर