राहें - 13

राहेंगर्मी का मौसम, तेज धूप और गर्म तेज चलती हवायें वातावरणको शुष्क बनायें हुयी थी। पलंग पर बैठा किशोर अपने कटे पैरों को देखकर दर्द से कराह रहा था, तभी ठंडे झोंकें की तरह श्वेत वस्त्रधारिणी, चेहरे पर पवित्रता की दिव्य आभा लिये कुमुद (बड़ी माँ)कमरें में आईं और बडे प्यार से बोली - क्या हाल है, किशोर बेटे,कैसी तबियत है तुम्हारी ? - कहते हुये उसने किशोर के सिर परहाथ फेरा, बालों को सहलाया उसके पैरों को देखा - फिर बोली- कई दिन से मैं तुमसेमिलने की सोच रही थी, आज आ पायी, तुम्हारी तरफ से चिंता बनीरहती है -