गुड सर्वेंट

            वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीहेड पोस्ट ऑफिस की पुरानी इमारत शहर के बीचो-बीच अंग्रेज़ी हुकूमत की अकड़ की तरह खड़ी थी। सुबह के धुंधलके में जब पूरा शहर उनींदा पड़ा रहता, तब बाबू सतीश चंद्र सबसे पहले इस इमारत का ताला खुलवाता। वह अपनी नौकरी को पूजा समझता था। उसकी दुनिया कुछ रजिस्टरों, सरकारी मुहरों और हिसाब- किताब की सीधी रेखाओं में सिमटी हुई थी। सतीश की एक आदत पूरे दफ्तर में मशहूर थी- वह पोस्टमास्टर वाल्टर मसीह के आने से पहले पहुंचता और उनके जाने के बाद ही घर लौटता। अंग्रेज़ पोस्ट मास्टर कई बार उसके इस समर्पण पर मुस्कुराया