अधूरापन - 2

  • 117

अध्याय-२भार्गवी अपनी जेठानी के गले लग गई और मानो दोनों एक-दूसरे का साथ देते हुए मूक सहमति दे रही थीं। दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और दोनों के भीतर एक अटूट ऊर्जा का संचार हुआ। मानो दोनों एक ही माँ की बेटियाँ हों, वैसा ही एक जैसा अनुभव कर रही थीं। हाँ, लेकिन जो भार्गवी के साथ हुआ, उसका मलाल तो दोनों के मन में था ही और उससे उपजा दर्द मानो दोनों के अंदर शूल की तरह चुभ रहा था। लेकिन अब आगे ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे, इस विचार पर दोनों का मन पक्का हो चुका