जंगल - 43

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                उलझने (43) ज़िन्दगी मतलब की कुंजी है, लोगो का यही मानना होता है मतलब निकले हम कही तुम कही। जलधर के साथ एक गांव मे उतरा आधी अब पंजाबी और हिंदी बोल देता था... गांव की वही सडके यहां धीरे धीरे चल था। जो वहा भगति का रस था शंकर के जैकारे थे वो अब भी जैसे कानो मे गुजन करते थे। कितना मनमोहक समय था। जो गुज़र रहा था... धीरे धीरे। गांव मे अनजाना सा लगता था नया कोई जैसे आया हो चार साल बाद... सड़क भी सुनसान सी थी.. हाँ कोई