माइनर टाउन: जागरण

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झुलसता हुआ कल   युग ने अपनी झुग्गी का दरवाज़ा धकेल कर खोला। कब्ज़े चीख उठे — जंग खाई धातु पर जंग खाई धातु — और रोशनी से पहले बाहर की हवा उससे टकराई। रासायनिक। तीखी। ऐसी गंध जो गले के पिछले हिस्से पर परत जमा देती और घंटों वहीं टिकी रहती। उसने वापस अँधेरे में झाँका। उसकी बहन नैना फ़र्श पर पालथी मारे बैठी थी, ताँबे के उस टुकड़े पर झुकी हुई जिसे उसने पिछली रात नाबदान से निकाला था। उसकी उँगलियाँ ऐसी बारीकी से चल रही थीं जो युग में कभी न होगी — एक धुँधले सीरियल