शीर्षक: " अंतिम चिट्ठी"एक छोटे से पहाड़ी गाँव में रहने वाला सोलह वर्षीय आरव हर रात छत पर लेटकर तारों को घंटों निहारा करता था। गाँव वाले उसे "पागल खगोलशास्त्री" कहकर चिढ़ाते थे। कोई कहता, "तारे कभी किसी से बात नहीं करते." कोई हँसते हुए कहता, "अगर ऊपर वाले के पास इतना समय होता तो पहले हमारी समस्याएँ हल करता."पर आरव मुस्करा देता. उसे विश्वास था कि ब्रह्मांड मौन नहीं है, बस उसकी भाषा अलग है.उसके दादाजी कहा करते थे, "बेटा, तारे सिर्फ रोशनी नहीं भेजते, वे समय भेजते हैं. जो प्रकाश आज तुम्हें दिखाई दे रहा है, वह लाखों