टाम ज़िंदा हैं - 21

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--------------43----------------                                       टूटे हुए तारे कितने आकाश मे जा चुके होंगे जमी पर, पर आकाश को कोई फर्क नहीं पड़ता। महताब चमकते चमकते कब बादल आ जाये उसको भी कोई फर्क नहीं पड़ता। बस एक फर्क पड़ता है मुफलिस इंसान को..... जो मिला छीन गया, मुकदर का। चाचा मंजूर साहब एक लम्बी सड़क से चलते जा रहे थे। पर चुप। एक दम चुप। कौन कहता है कोई बोले बिना उसके इशारे से इधर उधर हो जाये.... आखिर कौन था मंजूर??पुलिस डिपार्टमेंट का एक लम्मी