कहानी: सुनहरा फलकउसके चारों ओर एक सुनहरे रंग की परत है जो कि आसमान तक जाती है। जितनी ऊँची उसकी निगाहें फैल सकती हैं, वहाँ तक सब कुछ अस्पष्ट नज़र आता था। कालापन अब और भी बढ़ गया था। पास में एक चिमनी से ऊँचे-ऊँचे काले बादल निकल रहे थे। मदन को यही लगता था कि इसी से बादल बनते हैं, क्योंकि कुछ ऊँचाई के बाद यह धुआँ भी बादल का हिस्सा हो जाता था।वह उस चिमनी को देखे जा रहा था। तभी उसे एक मज़दूर ने आकर कहा, जो कि अपने मुँह में गुटका भरे हुए था, "मदन, तू