Devil की दास्तान - 37

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(सांझ का समय। आसमान में हल्का सूरज डूब रहा है।सुनहरी रोशनी मंदिर की सीढ़ियों पर बिखरी हुई है।मंदिर के बाहर कबीर (असल में करण) और सिया (असल में सिमरन) खड़े हैं।दोनों के चेहरों पर हल्की मुस्कान है, पर दिल में अलग-अलग भाव —एक के लिए ये पहली शादी थी… दूसरे के लिए, वही अधूरी कहानी का दूसरा अध्याय।)(मंदिर की घंटियाँ बज रही हैं, हवा में अगरबत्ती की खुशबू फैली है।सिया ने लाल साड़ी पहनी है, माथे पर हल्का सिंदूर —बिना जाने कि वही रंग उसके भाग्य का चक्र पूरा करने वाला है।)सिया (मुस्कुराते हुए) बोली - “कबीर जी… अचानक मंदिर क्यों