राहें - 12

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नया घरकई दिनों से अंकित के घर की सजावट हो रही थी। सुन्दरभवन को रंग बिरंगी लाइट की झालरों से सजाया जा रहा था।अभिषेक अपने पुराने घर के बरांडे में खड़े होकर अंकित जैन के भव्यघर को देख रहा था। मन ही मन अपनी किस्मत पर कुढ़ता भी जारहा अभिषेक बचपन से एक ही स्कूल व कालेज में साथ साथ पढ़ेहैं, सोचता कहाँ उसका ऑलीशान घर कहाँ मेरा पुराने जमाने काछोटा सा घर। उसे भी अपने लिये बड़े भव्य घर बनाने की इच्छा हुयीऔर वह इन्ही सवालों में डूबा सोचता रहा। तभी आंकित ने उसे कार्डदेते हुये कहा अभिषेक कल