दूसरों के लिए हर बार “हाँ” कहना, कहीं अपने लिए “ना” कहना तो नहीं बन जाता?आज मैंने अपने भीतर एक बात महसूस की, मैं कितनी आसानी से “हाँ” कह देती हूँ, तब भी जब मेरा मन पूरी तरह तैयार नहीं होता।इसलिए नहीं कि मैं हमेशा वह काम करना चाहती हूँ…बल्कि इसलिए कि मैं किसी को निराश नहीं करना चाहती, किसी का दिल नहीं दुखाना चाहती या किसी को असहज महसूस नहीं कराना चाहती।सुबह किसी ने मुझसे एक छोटा-सा काम करने को कहा। मैं पहले से ही कई कामों में व्यस्त थी। फिर भी मेरी पहली प्रतिक्रिया थी “हाँ”।और मैंने हाँ