पंजाब की सुनहरी धूप में चमकते वो पाँच एकड़ के खेत अब विक्रम की मलकियत नहीं रहे थे। आज सुबह ही तहसील में कांपते हाथों से अंगूठा लगाकर आए थे विक्रम। उनके हाथों की वो गहरी लकीरें उस मिट्टी की गवाह थीं, जिसे उन्होंने अपनी पूरी जवानी और रगों का खून देकर सींचा था। पर आज, उन्हीं हाथों ने अपनी 'माँ' जैसी ज़मीन को एक अनजान दलाल के नाम कर दिया। वजह सिर्फ इतनी थी कि बेटा आर्यन और बहू रिया का वो 'कनाडा' वाला सपना पूरा हो सके। उन्हें लगा था कि परदेस की धरती पर कदम रखते ही