आधी रात का यात्रीबरसात की एक ठंडी रात थी। घड़ी में ठीक बारह बज रहे थे। छोटे से गाँव भैरवपुर का रेलवे स्टेशन लगभग सुनसान था। स्टेशन मास्टर रमेश अपनी ड्यूटी पूरी करने ही वाला था कि तभी एक पुरानी ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी। हैरानी की बात यह थी कि उस ट्रेन का उस स्टेशन पर रुकने का कोई समय नहीं था।ट्रेन से केवल एक बूढ़ा आदमी उतरा। उसके हाथ में पुराना चमड़े का बैग था और चेहरे पर अजीब सी मुस्कान। उसने रमेश से पूछा, "बेटा, यहाँ से पुराने शिव मंदिर का रास्ता किधर है?"रमेश ने रास्ता