संघर्ष से सफलता तकएक छोटे से गाँव में रहने वाला आदित्य बचपन से ही बड़े सपने देखता था। उसके पिता दिहाड़ी मजदूर थे और माँ लोगों के घरों में खाना बनाकर परिवार का खर्च चलाती थीं। घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कई बार पूरे परिवार को एक समय का खाना खाकर ही सोना पड़ता था। फिर भी आदित्य के माता-पिता हमेशा कहते थे, "बेटा, गरीबी हमारी मजबूरी है, लेकिन मेहनत हमारी पहचान होगी।"आदित्य रोज़ सुबह पाँच बजे उठता, अपने पिता के साथ थोड़ा काम करता और फिर स्कूल चला जाता। उसके पास नई किताबें नहीं थीं। वह