रात और दिन...दोनों का इस कमरे में कोई अस्तित्व नहीं था।छोटे से, जर्जर अपार्टमेंट के एक कमरे की हर दीवार किसी पागल इंसान के दिमाग की तरह दिखाई दे रही थी।दीवारों पर सैकड़ों तस्वीरें टंगी थीं।कहीं वर्षों पुराने मर्डर केस...कहीं पहचान से परे विकृत लाशें...कहीं खून से सने अजीब प्रतीक...कहीं इंसानों जैसी आकृतियाँ, जिनके चेहरे धुंधले थे, मानो कैमरा भी उन्हें ठीक से कैद न कर पाया हो।हर तस्वीर एक लाल मार्कर की मोटी रेखा से दूसरी तस्वीर से जुड़ी हुई थी।कुछ जगहों पर तारीखें लिखी थीं...कुछ जगहों पर प्रश्नचिह्न...और सबसे बीच में एक तस्वीर लगी थी।एक काले धातु की