आख़िरी कॉल रात 12

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आख़िरी कॉलरात के ठीक 12 बजे थे। नेहा अपने कमरे में अकेली बैठी थी। तभी उसका मोबाइल बजा।स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था... सिर्फ़ लिखा था—"Unknown"।नेहा ने कॉल उठाई।दूसरी तरफ़ से धीमी आवाज़ आई, "दरवाज़ा मत खोलना... कोई तुम्हें देख रहा है।"नेहा घबरा गई। उसने तुरंत खिड़की से बाहर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था।उसे लगा शायद कोई मज़ाक कर रहा है। तभी फिर वही आवाज़ आई—"अगर ज़िंदा रहना चाहती हो... तो पीछे मुड़कर मत देखना।"नेहा के हाथ काँपने लगे। उसे महसूस हुआ कि कमरे में उसके पीछे जैसे कोई खड़ा है।लेकिन उसने हिम्मत करके पीछे नहीं देखा।कुछ सेकंड बाद